आग लगी…

आग लगी जब घर में,

उन्होंने पूछा “बचा क्या है?”

मैनें कहा “मैं”

वो बोलें “फिर जला ही क्या है?”

Published by कवि-आ-काश

दिन बीत गए रात गुज़र गयी, सम्पूर्ण पृष्ठ खाली ही रह गयी। दिल की सारी बातें अपनी, दिल में ही दबकर रह गयी।

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